पूर्वांचल पलायन क्यों नहीं बन रहा है चुनावी मुद्दा ?

गृह मंत्री अमित साह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कैराना पलायन तो दिखाई देता है पर पूर्वांचल पलायन नहीं 

चरण सिंह राजपूत 

नई दिल्ली/लखनऊ। इसे जागरूकता का अभाव कहें या स्वार्थ या फिर राजनीतिक दलों का दबाव कि उत्तर प्रदेश चुनाव से जमीनी मुद्दे गायब हैं। चाहे रोजगार का मामला हो या महंगाई या फिर रोजगार छीनने का लोग जैसे सब कुछ भूल गए हैं। यहां तक राजनीतिक रूप से जागरुक माने जाने वाले और पूर्वांचल के लोग भी इस मामले में राजनीतिक दलों के पिछलग्गू हो रहे हैं। पूर्वांचल के पढ़े लिखे युवा मुंबई, दिल्ली, सूरत, बंगलूरू और चेन्नई जैसे शहरों की में झोपड़ियों में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं कोरोना काल में पूर्वांचल के लोगों का विभिन्न महानगरों से भी बड़े स्तर पलायन हुआ है। यह भी न तो अब पूर्वांचल के लोगों के लोगों को महसूस हो रहा है  और न ही राजनीतिक दलों को।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में सारा जोर अयोध्या के मंदिर, वाराणसी के कैरीडोर, हवाई अड्डे, हाईवे पर रहा पर वाराणसी, मिर्जापुर के दम तोड़ रहे लघु उद्योगों की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं गया। वैसे तो पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों से युवाओं का पलायन है पर जौनपुर से तो बड़े स्तर पर हो रहा है। अचानक घोषित तालाबंदी में पूर्वांचल के लोगों को पैदल विपरीत पलायन करना पड़ा, भूखे, प्यासे 1500 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। अब जब चुनाव में यह मुद्दा बनना चाहिए था तो लोग अपने में मशूगल हैं। गृह मंत्री अमित साह को कैराना में हिंदुओं का हो रहा पलायन तो दिखाई दे रहा था पर पूर्वांचल में रोजगार की वजह से हो रहा युवाओं का पलायन नहीं दिखाई दे रहा है ? योगी आदित्यनाथ तो पूर्वांचल के नेता माने जाते हैं और गोरखपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री खुद वाराणसी से सांसद हैं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का गृह जनपद वाराणसी है।
सत्ता पक्ष तो इस मामले को उठा ही नहीं रहा है साथ ही विपक्ष भी भावनात्मक मुद्दों में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को सपने में श्रीकृष्ण आकर सपा की सरकार बनाने की बात तो बता रहे हैं पर पूर्वांचल से हो रहे युवाओं के पलायन को न कोई जागते हुए बता रहा है और न ही कोई सपने में। यह भी विडंबना ही है कि पूर्वांचल में रोजगार तो है ही नहीं पर जब युवा रोजगार मांगते हैं तो उन पर लाठियां भांजी जाती है। रोजगार मांगने  पर प्रयागराज और ईकोगार्डेन लखनऊ में युवाओं पर लाठियां भांजी गई।

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