भारत ने लगभग ८ साल बाद (आखिरी बार जून २०१८ में) ईरान से LPG (कुकिंग गैस) की एक खेप खरीदी है।
मुख्य बातें:
Indian Oil Corporation (IOC) ने यह कार्गो खरीदा है, जिसे अन्य राज्य-owned कंपनियों (जैसे Bharat Petroleum आदि) के साथ शेयर किया जाएगा।
टैंकर (संभवतः Aurora) शुरू में चीन जा रहा था, लेकिन भारत ने इसे डायवर्ट कर लिया। यह जल्द ही मैंगलोर (पश्चिमी तट) पोर्ट पहुंचने वाला है।
यह खरीद अमेरिका द्वारा ईरान के तेल और रिफाइंड फ्यूल्स (जिसमें LPG शामिल) पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी छूट (waiver) दिए जाने के बाद हुई है। ट्रंप प्रशासन ने तेल-गैस कीमतें नियंत्रित रखने के लिए ३० दिन की छूट दी थी।
भुगतान रुपये में होने की संभावना है, जो डॉलर-आधारित प्रतिबंधों को बायपास करने में मदद करता है।
क्यों जरूरी पड़ी यह खेप?
‘भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG importer है। कुल खपत में से करीब ६०% आयात पर निर्भर है, और उसमें से ९०% Middle East (खासकर Hormuz Strait) से आता है।
फरवरी-मार्च २०२६ में US-Israel vs Iran संघर्ष के कारण Strait of Hormuz में disruption हुआ, जिससे मार्च में LPG आयात करीब ४६-५०% घट गया। इससे घरेलू स्तर पर कुकिंग गैस की कमी (shortage) और कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई।
इस संकट के बीच भारत ने सप्लाई डाइवर्सिफाई करने के प्रयास किए — US, Argentina आदि से भी आयात बढ़ाया, लेकिन ईरान से यह सीधा कार्गो राहत देगा।
यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतों (रसोई गैस) को ध्यान में रखकर उठाया गया है। अभी यह एक छोटा कार्गो (~४३,००० टन) है, लेकिन संकट के समय में महत्वपूर्ण है। आगे की खेपें US waiver की अवधि और Hormuz स्थिति पर निर्भर करेंगी।

