नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स/एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स की कई याचिकाओं और मॉडिफिकेशन एप्लिकेशन्स को खारिज करते हुए नवंबर 2025 के अपने आदेश को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल, कॉलेज), अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अन्य सार्वजनिक/संस्थागत जगहों से आवारा कुत्तों (stray dogs) को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। इन जगहों से पकड़े गए कुत्तों को स्टरलाइजेशन (नसबंदी) और वैक्सीनेशन के बाद शेल्टर होम्स में शिफ्ट करना होगा। इन्हें उसी इलाके में वापस नहीं छोड़ा जाएगा (खासकर संवेदनशील जगहों पर)। यह आदेश देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होता है। कोर्ट ने जन सुरक्षा (Article 21) को प्राथमिकता दी, क्योंकि कुत्तों के काटने के मामले बहुत बढ़ गए हैं (2024 में देशभर में 37 लाख+ केस रिपोर्ट हुए)।
डॉग लवर्स की याचिकाओं का क्या हुआ?
डॉग लवर्स और एनजीओ की तरफ से कई याचिकाएं और इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की गईं, जिसमें पुराने ABC (Animal Birth Control) Rules के तहत स्ट्रीट्स पर वापस छोड़ने की मांग की गई। मई 2026 के आसपास कोर्ट ने इन चुनौतियों को खारिज कर दिया और नवंबर 2025 के आदेश को अपहोल्ड किया। बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ आदि) ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों से कुत्तों को हटाना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरे स्ट्रीट्स से सभी कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं है, लेकिन संवेदनशील सार्वजनिक जगहों पर उनका रहना जन सुरक्षा के लिए खतरा है।
पहले अगस्त 2025 में दिल्ली-NCR के लिए सख्त ऑर्डर आया था (सभी कुत्तों को शेल्टर्स में), लेकिन पब्लिक आउट्रेज के बाद उसे कुछ संशोधित किया गया था। नवंबर 2025 का ऑर्डर फिर से मजबूत हुआ, और हालिया सुनवाई में डॉग लवर्स की दलीलें खारिज हुईं।

