LPG संकट का ‘उज्ज्वला’ एंगल आज की सबसे बड़ी चर्चा है। मार्च 2026 में ईरान-इजराइल तनाव (या मिडिल ईस्ट युद्ध) के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LPG आयात प्रभावित हुआ है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और कुल खपत का करीब 60% आयात पर निर्भर। इससे कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई कट गई, घरेलू पर दबाव बढ़ा, कीमतें चढ़ीं (दिल्ली में 14.2 kg घरेलू सिलेंडर ₹913 हो गया) और अफवाहों से लंबी कतारें लग गईं। लेकिन सवाल यह है – यह ‘सिलेंडर क्रांति’ कैसे गले की फांस बन गई?
उज्ज्वला की क्रांति: क्या था कमाल?
2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) ने गरीब परिवारों (खासकर महिलाओं) को मुफ्त LPG कनेक्शन दिए। नतीजा: 2014 के करीब 18 करोड़ कनेक्शन से आज कुल 32-33 करोड़ घरेलू कनेक्शन हो गए। उज्ज्वला के तहत 10 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन बने। LPG कवरेज 99% तक पहुंच गया। लकड़ी-कोयले-गोबर के चूल्हे पीछे छूट गए। महिलाओं का समय बचा, धुआं कम हुआ, स्वास्थ्य सुधरा (हर साल लाखों मौतें रुकीं)। यह सच में सिलेंडर क्रांति थी – गरीब घरों में भी LPG का ‘लाल सिलेंडर’ आम हो गया।
लेकिन यही क्रांति अब फांस क्यों?
उज्ज्वला ने मांग को इतना बढ़ा दिया कि सप्लाई प्लानिंग पीछे छूट गई।
पहले घरेलू LPG खपत कम थी, अब प्रति व्यक्ति रिफिल बढ़ गया।
भारत का आयात बढ़कर 60%+ हो गया (ज्यादातर मिडिल ईस्ट से, होर्मुज रूट से)।
घरेलू उत्पादन और रिजर्व पर्याप्त नहीं बढ़ाए गए।
सब्सिडी भी सीमित: उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹300 सब्सिडी मिलती है (प्रभावी कीमत ~₹613), लेकिन बाकी को मार्केट रेट। कई गरीब परिवार 9-12 रिफिल के बाद रुक जाते थे, अब संकट में और मुश्किल।
नतीजा? आज जब आयात पर झटका लगा, तो पूरी व्यवस्था हिल गई। रेस्टोरेंट-होटल बंद होने लगे (कमर्शियल सिलेंडर बंद), गरीब घरों में फिर चूल्हा जलने लगा, इंडक्शन चूल्हे की बिक्री बढ़ी लेकिन बिजली महंगी। काले बाजार, पैनिक बुकिंग, अफवाहें – सब बढ़ गया। यानी उज्ज्वला ने LPG को ‘जन-आंदोलन’ बना दिया, लेकिन बिना बैकअप (इथेनॉल, बायोगैस, सोलर कुकिंग) के यह आयात-निर्भरता की फांस बन गई।
सरकार का रुख और वास्तविकता
सरकार कह रही है – घरेलू LPG पर कोई कमी नहीं, रिफाइनरी से उत्पादन बढ़ाया गया, कमर्शियल पर सख्ती, 48,000 KL मिट्टी तेल वैकल्पिक रूप से दिया। PM मोदी ने कहा – “पैनिक फैलाने वाले देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं”। सब्सिडी 2025-26 के लिए ₹12,000 करोड़ + अतिरिक्त ₹30,000 करोड़ का प्रावधान है। लेकिन आलोचना यही है कि मांग का इतना बड़ा विस्फोट (उज्ज्वला के कारण) पहले ही अनुमान लगाकर वैकल्पिक स्रोत बढ़ाने चाहिए थे।