नौकरी छोड़ने (इस्तीफा) या निकाले जाने (टर्मिनेशन/रिट्रेंचमेंट) की स्थिति में कंपनी को अब तुरंत कुछ महत्वपूर्ण काम करने होंगे। यह नए लेबर कोड (Labour Codes) के तहत बड़ा बदलाव है, जो 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुके हैं और कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 के आसपास और प्रभावी रूप से चर्चा में हैं।
मुख्य बदलाव: Full & Final (FnF) Settlement सिर्फ 2 वर्किंग दिनों में
नए Code on Wages, 2019 की धारा 17(2) के अनुसार:
कर्मचारी के आखिरी वर्किंग डे के बाद कंपनी को 2 वर्किंग दिनों (working days) के अंदर पूरा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना अनिवार्य है।
यह नियम लागू होता है इन सभी मामलों में:
इस्तीफा देने पर (resignation)
नौकरी से निकाले जाने पर (dismissal/termination)
छंटनी (retrenchment)
कंपनी/यूनिट बंद होने पर (closure)
क्या शामिल है FnF में?
आखिरी महीने की सैलरी
बकाया लीव एनकैशमेंट (leave encashment)
बोनस (अगर पात्र हो)
अन्य बकाया राशि (जैसे overtime आदि)
नोट: ग्रेच्युटी (gratuity) का भुगतान अलग नियमों से होता है (आमतौर पर 30 दिनों के अंदर), लेकिन बाकी वेजेस/बकाया 2 दिनों में चुकाने होंगे।
पहले यह प्रक्रिया 30-45 दिनों या उससे ज्यादा समय लेती थी, जिससे कर्मचारियों को परेशानी होती थी। अब कंपनी को देरी नहीं करनी पड़ेगी।
अगर कंपनी देरी करे तो क्या?
नियम का उल्लंघन करने पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई हो सकती है।
कर्मचारी शिकायत दर्ज करा सकते हैं (Labour Department या संबंधित अथॉरिटी के पास)।
कुछ मामलों में ब्याज भी क्लेम किया जा सकता है।
अन्य संबंधित बदलाव (नए कानून में)
रिट्रेंचमेंट में कुछ मामलों में 15 दिनों की अतिरिक्त सैलरी (re-skilling fund contribution) का प्रावधान भी है, जो कर्मचारी के खाते में जाता है।
बड़े establishments (300+ कर्मचारी) में लेऑफ/छंटनी/बंदी के लिए सरकारी अनुमति जरूरी (पुराना threshold 100 था, अब बढ़ा दिया गया)।
सभी कर्मचारियों को appointment letter अनिवार्य रूप से देना होगा।
वेज स्लिप हर महीने देनी होगी।
PF (EPF) के लिए अलग नियम: कंपनी का FnF सेटलमेंट 2 दिनों में होगा, लेकिन PF निकासी EPFO के अपने नियमों से होती है (75% तुरंत, बाकी बाद में बेरोजगारी की स्थिति में)। FnF में मुख्य रूप से सैलरी और बकाया शामिल होता है, PF अलग प्रोसेस है। सलाह कर्मचारियों के लिए इस्तीफा देते समय लिखित में सब कुछ रिकॉर्ड करें। आखिरी दिन के बाद 2 वर्किंग दिनों में FnF की पुष्टि लें। अगर देरी हो तो HR को लिखित रिमाइंडर दें और जरूरत पड़ने पर Labour helpline (जैसे 14434) या Samadhan पोर्टल पर शिकायत करें। यह बदलाव कर्मचारियों को तुरंत वित्तीय राहत देता है और कंपनियों पर अनुशासन बढ़ाता है। अगर आपकी कोई खास स्थिति है (जैसे नोटिस पीरियड, ग्रेच्युटी आदि), तो अपने employment contract और राज्य-विशेष नियम भी चेक करें, क्योंकि कुछ राज्य नियम थोड़े अलग हो सकते हैं। किसी और डिटेल की जरूरत हो तो बताएं!








