बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही सत्तारुढ़ भाजपा हर तरह का दमन चक्र अपने विरोधियों के खिलाफ चला रही है। कल कोलकाता में लोकसभा के संसद सदस्य अभिषेक बनर्जी तथा कल्याण बनर्जी पर भाजपा के लोगों ने जिस प्रकार जानलेवा हमला किया उससे साफ जाहिर होता है कि सरकार ने अपने समर्थकों को खुली छूट दे रखी है, जैसा चाहो करो। इस प्रकार की हिंसक घटनाओं के समर्थन में सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि यह तो जनता का आक्रोश है।
हाल ही में हुए चुनाव में किस प्रकार चुनाव आयोग, केंद्र सरकार की सरकारी एजेंसी यों तथा न्यायपालिका के मौन समर्थन से यह सरकार बनी तथा ममता बनर्जी की पार्टी को और भाजपा को कितने प्रतिशत वोट मिले यह भी गौर तलब है भाजपा को 45.84% वोट मिले जबकि तृणमूल कांग्रेस को 40.80% वोट मिले, सिर्फ 5% वोट ंँका फर्क है, आज बंगाल का नया मुख्यमंत्री किस भाषा का प्रयोग कर रहा है। ईडी, सीबीआई तथा दूसरी सरकारी एजेंसियां विरोधियों के साथ जो व्यवहार कर रही है वह सब देश के सामने है। सत्ता की मदहोशी में कानून की कोई हैसियत बची ही नहीं। सत्ता की आड़ में यह सब हो रहा है वरना किसकी मजाल थी की जनता के प्रतिनिधि की सरे आम जान लेने की हिम्मत किसकी होती। वक्त का तकाजा है अब संपूर्ण विपक्ष को गोलबंद होकर इस तानाशाही, बर्बरता के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए।
- राजकुमार जैन

