ईरानी संसद अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने ट्रंप को 20 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया — “सरेंडर करो वरना सहयोगी देश पाषाण युग में चले जाएंगे!”
ये बयान ट्रंप की डेडलाइन के जवाब में आया है, जहाँ अमेरिका-इजरायल ईरान पर दबाव बना रहे हैं।
वास्तविकता ये है:
ईरान की सेना मजबूत है, लेकिन अमेरिका की सैन्य ताकत (हवाई, नौसेना, टेक्नोलॉजी) के सामने “20 घंटे में सरेंडर” वाली बात ज्यादा रेटोरिक लगती है।
ट्रंप ने भी ईरान को “डील करो वरना भारी पड़ जाएगा” कहा था। दोनों तरफ से धमकियाँ चल रही हैं।
फिलहाल कोई सरेंडर नहीं हो रहा। ये मिडिल ईस्ट का क्लासिक “मुँह-जोरी” वाला दौर है — दोनों तरफ से बयानबाजी, ताकि नेगोशिएशन में मजबूती रहे।
20 घंटे बाद क्या होगा?
शायद कुछ नहीं। या फिर और हमले-प्रतिहमले। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की आशंका, तेल की कीमतें बढ़ना, और दुनिया टेंशन में।
अरे यार, असली सरेंडर तो सबको शांति चाहिए। युद्ध में कोई नहीं जीतता — सिर्फ आम लोग हारते हैं।

