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सरकार ने रिलायंस-BP से मांगे $30 अरब?

हाल ही में खबर आई है कि भारतीय सरकार रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और उसकी पार्टनर कंपनी BP से 30 अरब डॉलर (लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का मुआवजा मांग रही है। यह भारत सरकार का अब तक का किसी कंपनी के खिलाफ सबसे बड़ा दावा है।

 

क्या है विवाद की जड़?

 

यह मामला कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन के KG-D6 ब्लॉक के D1 और D3 डीपवाटर गैस फील्ड्स से जुड़ा है।
साल 2000 में सरकार ने रिलायंस को यह ब्लॉक प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) के तहत दिया था।
रिलायंस ने शुरुआत में अनुमान लगाया था कि इन फील्ड्स से करीब 10 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (tcf) गैस निकल सकती है।
लेकिन वास्तव में सिर्फ 20% के आसपास ही उत्पादन हुआ।
सरकार का आरोप है कि रिलायंस और BP की मिसमैनेजमेंट (जैसे कम वेल्स ड्रिल करना – प्लान में 31 थे, सिर्फ 18 ड्रिल किए; और आक्रामक उत्पादन तरीके) की वजह से ज्यादातर रिजर्व खराब हो गए या खो गए।
सरकार का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, खोजी गई गैस पर सरकार का मालिकाना हक है, इसलिए उत्पादन न होने की कीमत का मुआवजा कंपनियों को देना चाहिए।

 

अन्य महत्वपूर्ण बातें

 

2011 में रिलायंस ने KG-D6 सहित कई ब्लॉक्स में BP को 30% हिस्सा $7.2 अरब में बेचा था।
यह प्रोजेक्ट भारत का पहला बड़ा डीपवाटर गैस प्रोजेक्ट था, जो देश की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए अहम माना जाता था, लेकिन तकनीकी समस्याओं (वाटर इंग्रेस, रिजर्वॉयर प्रेशर कम होना) और कॉस्ट रिकवरी विवादों की वजह से उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
आरबिट्रेशन प्रक्रिया: 2016 से चल रही है। फाइनल आर्ग्यूमेंट्स नवंबर 2025 में खत्म हुए। फैसला मिड-2026 में आने की उम्मीद है। फैसला कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है।

 

कंपनियों का पक्ष:

 

लायंस और BP दोनों इस दावे से इनकार करते हैं और कहते हैं कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं देना चाहिए।
रिलायंस के स्पोक्सपर्सन ने कहा कि आरबिट्रेशन गोपनीय है, इसलिए कोई कमेंट नहीं।
BP ने भी कमेंट करने से इनकार किया।

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