नई दिल्ली। हिन्दू महिलाओं की तरह मुस्लिम महिलाओं ने भी पिता की सम्पत्ति में हिस्सा मांगा है। दरअसल मुस्लिम उत्तराधिकार कानून में महिलाओं के साथ भेदभाव को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। मुस्लिम महिलाओं को भी हिंदू महिलाओं की तरह ही समान अधिकार दिलाने के लिए दायर पीआईएल में इसके लिए शरियत कानूनों में बदलाव की मांग की गई है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ में उत्तराधिकार के मामले में लिंग के आधार पर भेदभाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल डाली गई, जिस पर बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने नोटिस जारी किया है। पीआईएल में कहा गया है कि उत्तराधिकार और पैतृक संपत्ति के मामले में मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव किया जाता है और यह समानता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
‘मुस्लिम महिलाओं को भी संपत्ति में मिले समान हिस्सा’
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर इम्तियाज हुसैन शहाबुद्दीन मुल्ला ने पीआईएल दायर की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की गई है कि मुस्लिम महिलाओं को भी विरासत और उत्तराधिकार में समानता दी जाए, जिसमें पैतृक संपत्ति में भी उनके अधिकार शामिल हैं।
हिंदू महिलाओं की तरह ही मुस्लिम महिलाएं भी हकदार
याचिकाकर्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘याचिका दाखिल करने का मेरा मकसद मुस्लिम महिलाओं को मुख्यधारा में लाना है।…मुस्लिम महिलाओं को मुख्यधारा से वंचित रखा गया है। संविधान लागू हुए करीब 77 साल हो गए, मेरा मानना है कि प्रॉपर्टी में महिलाओं को समान हक मिलना चाहिए। आज की तारीख में लड़के से आधा मिलता है। जबकि, कानून की नजरों में सभी समान हैं…। जैसे हिंदू महिलाओं को मिलते हैं, वैसे ही हिस्सा मिलना चाहिए।’
अगर कोर्ट में मामला चल रहा है..एक हिंदू और एक मुस्लिम लड़की दोनों बैठी हैं। कोर्ट को जजमेंट देना पड़ता है कि हिंदू उत्तराधिकार कानून में समान अधिकार है और उसी कोर्ट में उस लड़की को हाफ-हाफ दिया जाता है, तो ये कंफ्लिक्ट हो जाता है। सिर्फ जाति के आधार पर किसी को आधा दे देना मेरे हिसाब से उसको वहां पे ये बहुत फील होता होगा कि मैं मुस्लिम हूं इसलिए मुझे इक्वलिटी से वंचित रखा गया..।
शरिया कानून में संशोधन की मांग
इस केस में याचिकाकर्ता के वकील कृष्णा एम सिंह ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से शरिया कानून में बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं को पैतृक और पिता की संपत्ति में समान अधिकार दिलाने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट से शरिया कानून में संशोधन की मांग की है, क्योंकि अभी उन्हें बेटे से आधा हिस्सा दिया जाता है। इस मामले में भी समानता होनी चाहिए।’

