डोनाल्ड ट्रंप भारत से इसलिए फ्रस्ट्रेट हैं क्योंकि उनके अनुसार भारत अमेरिका पर बहुत ऊंचे टैरिफ लगाता है, जिससे अमेरिकी उत्पाद भारत में नहीं बिक पाते और व्यापार असंतुलित है। ट्रंप ने इसे “एकतरफा आपदा” कहा है, जहां भारत अमेरिका को अपना सबसे बड़ा ग्राहक मानता है लेकिन अमेरिका भारत को बहुत कम बेच पाता है। इसके अलावा, भारत रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदता है, न कि अमेरिका से, जो रूस की यूक्रेन युद्ध में मदद करता है। इसी वजह से ट्रंप ने भारत पर पुनिश 25% टैरिफ लगाया, जो पहले के 25% पर जुड़कर कुल 50% तक पहुंच गया है। यह टैरिफ भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचा रहा है, खासकर कपड़े, ज्वेलरी, फुटवियर और फर्नीचर जैसे क्षेत्रों में।
ट्रंप कोरिया और जापान का उदाहरण इसलिए दे रहे हैं क्योंकि इन देशों ने व्यापार वार्ताओं में रियायतें दीं और टैरिफ कम करवाए। दक्षिण कोरिया ने 350 अरब डॉलर का निवेश, अमेरिका से अधिक ऊर्जा आयात और चावल-बीफ पर रियायतें देकर टैरिफ को 15% पर लाया। जापान ने भी सौदे किए और टैरिफ घटवाए। वहीं, भारत ने कृषि, डेयरी और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी पहुंच की मांग ठुकरा दी, जिससे पांच दौर की बातचीत विफल रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि किसानों के हितों पर समझौता नहीं होगा, और भारत बैकडाउन नहीं करेगा। ट्रंप का कहना है कि भारत ने अमेरिकी सामान पर टैरिफ जीरो करने का ऑफर दिया था, लेकिन भारत इससे इनकार कर रहा है और बातचीत शुरू नहीं कर रहा।
ट्रंप कोरिया और जापान का उदाहरण इसलिए दे रहे हैं क्योंकि इन देशों ने व्यापार वार्ताओं में रियायतें दीं और टैरिफ कम करवाए। दक्षिण कोरिया ने 350 अरब डॉलर का निवेश, अमेरिका से अधिक ऊर्जा आयात और चावल-बीफ पर रियायतें देकर टैरिफ को 15% पर लाया। जापान ने भी सौदे किए और टैरिफ घटवाए। वहीं, भारत ने कृषि, डेयरी और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी पहुंच की मांग ठुकरा दी, जिससे पांच दौर की बातचीत विफल रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि किसानों के हितों पर समझौता नहीं होगा, और भारत बैकडाउन नहीं करेगा। ट्रंप का कहना है कि भारत ने अमेरिकी सामान पर टैरिफ जीरो करने का ऑफर दिया था, लेकिन भारत इससे इनकार कर रहा है और बातचीत शुरू नहीं कर रहा।

