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भारतीय सोशलिस्ट मंच ने मनाई भगत सिंह जयंती

आज महान क्रांतिकारी, महान विचारक और भारत माता के वीर सपूत शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती है। उन्होंने अपनी छोटी सी जिंदगी में देश की आजादी के लिए जो संघर्ष किया, उसकी मिसाल सदियों तक दी जाती रहेगी। भारतीय सोशलिस्ट मंच का मानना है कि आज का दिन केवल भगत सिंह को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों को समझने और अपने संघर्षों से जोड़ने का दिन है। भगत सिंह केवल हाथ में पिस्तौल रखने वाले क्रांतिकारी नहीं थे। वे किताबें पढ़ने वाले नौजवान थे, इतिहास और राजनीति को समझने वाले विचारक थे। वे एक ऐसे भारत का सपना देखते थे जिसमें इंसान द्वारा इंसान का शोषण न हो।उन्होंने कहा था क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।
आज देश का किसान खेत में अनाज पैदा करता है, मजदूर अपने पसीने से कारखाने बनाता है, नौजवान भविष्य के लिए संघर्ष करता है। लेकिन क्या उन्हें उनकी मेहनत का सम्मान मिल रहा है? क्या किसान को जमीन की सुरक्षा है? क्या मजदूर को सम्मानजनक मजदूरी मिल रही है। क्या नौजवान को शिक्षा और रोजगार मिल रहा है।
भगत सिंह ने सिखाया कि अन्याय के सामने चुप रहना समाधान नहीं है। इस अवसर पर भारतीय सोशलिस्ट मंच भगत सिंह के जीवन से तीन संकल्प लेता है।
साहस अन्याय के सामने डरना नहीं। अध्ययन और विचार सिर्फ नारों से परिवर्तन नहीं आता, हमें अपने अधिकारों और कानूनों को समझना होगा। एकता बंटे हुए समाज की आवाज कमजोर होती है। किसान, मजदूर और नौजवान की एकता ही लोकतंत्र को मजबूत करेगी। आज जयंती पर हम संकल्प लेते हैं कि हम जाति, धर्म, क्षेत्र से ऊपर उठकर भाईचारा सदभावना बंधुत्व न्याय और मेहनतकश लोगों की एकता को मजबूत करेंगे, लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों की आवाज उठाएंगे और संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे। हम भगत सिंह को केवल पोस्टर और नारों में नहीं, अपने विचारों और संघर्षों में जिंदा रखेंगे।

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