अगर औरत फलाना होती ढिमकाना होती तो ऐसा होता वैसा होता
फहज करो औरत हिरनी होती
क्या विशेष होता शिकार की ही चीज़ होती
औलादें आदम ने उसकी ख़ाल खींच कर अपनी दीवार पर सजा लेनी थी
मोर होती तो क्या किसी केबीनेट में मंत्री होती
क़तई नहीं मोर बनकर भी किसी मंत्री के सरकारी बंगले में क़ैद की गई होती
सर्दी गर्मी जाड़ा बरसात सभी ऋतुओं में नाच नाच अपने पैर छलनी कर रही होती
औलादें आदम ने उसके पंखों को नोच नोच खा जाना था
तितली होती तो क्या बन बन आज़ादी से उड़ रही होती
ये पर्दे का एहतमाम थोपने वाली आधी मख़लूक़
तितली को बुर्का पहनाकर रखती
औलादें आदम उसको कहां आज़ादी की हवा का स्वाद चखने देती
इसने कभी ठीक से जोग्राफिया की हवा मयस्सर न होने दी
तुम कैसी भी कल्पना करते रहो औरत की ए तथाकथित आधी मख़लूक़
न तुम उसे मोर रहने दोगे
न तितली बन कर उड़ने दोगो
न हिरनी जैसी मासूमियत उसमें बाक़ी रहने दोगे
न तुम उसे कभी इंसान समझोगे
न उसे कभी इंसान की तरह जीने दोगे
वो किसी भी जून में इस ज़मीन पर आए
तुम उसे तोहफे में पितृसत्तात्मक पुरुष प्रधान व्यवस्था ही दोगे
उसके लिए तुम्हारे ख़िस्से में यही है
एक पाओ संवाद तीन पाओ मौन दोगे
एक पाओ हंसी तीन पाओ ग़म और ख़ामोशी दे दोगे
औरत की जगह तुम अपने लिए कल्पना क्यों नहीं करते
तुम ऐसे होते वैसे होते तो दुनिया कितनी ख़ूबसूरत होती
जो तुम्हारा दिल भी होता मस्जिद की मीनारों मेहराबों की तरह पाक़-साफ
औरत के दामन भी दाग़ धब्बों से भरे न होते
जो तुम भी होते युसुफ की तरह अर्थव्यवस्था चलाने वाले
जो तुम भी होते मुहम्मद की तरह ख़तीजा का पैगाम क़ुबूल करने वाले
जो तुम भी होते याक़ूब नबी की तरह कलेजा रखने वाले
ज़ारो क़तार आंसू बहाए होते तुमने भी कभी
औरत के जिस्म को देख कर तुम्हें मूसा जैसी फीलिंग हुआ करती
आंखें बंद कर आगे बढ़ जाया करते तुम भी
इंसान हो इंसान रहो और दूसरी आधी मख़लूक़ को भी इंसान रहने दो
इतना भी मुश्किल नहीं है
ट्राई करके देखो बहुत आसान है
तुम तो पहाड़ पर चढ़ गये समन्दर के समन्दर तर गए
तुम तो बादलों को चीरते हुए उड़ उड़ दुनिया के गोसे गोसे में पंहुच गए
तुम तो चांद पर चढ़ गये
ये भी हो जाएगा ट्राई करके तो देखो तुम्हारे लिए क्या मुश्किल है !

