जानकारी के अनुसार पाकिस्तान ने भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में अपनी वैश्विक कूटनीतिक पहल शुरू की है। बिलावल भुट्टो-जरदारी के नेतृत्व में एक नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी, लंदन और ब्रसेल्स जैसे शहरों में पाकिस्तान का पक्ष रख रहा है, जबकि तारिक फातमी मॉस्को में रूसी अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। इन मिशनों का उद्देश्य पाकिस्तान को शांति की वकालत करने वाला और भारत के “आक्रामक कथानक” का जवाब देने वाला देश दिखाना है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये प्रतिनिधिमंडल भारत की “झूठी प्रचार” रणनीति का मुकाबला करने के लिए हैं, खासकर पाहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जिसमें भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। सीनेटर शेरी रहमान जैसे नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में भारत पर आतंकवाद के बहाने युद्ध को सामान्य करने का आरोप लगाया है, और बिलावल ने भी भारत के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं, जैसे कि इंडस वाटर ट्रीटी के निलंबन पर “पानी बहेगा या खून” जैसा बयान, हालांकि बाद में उन्होंने शांति की बात भी की।
भारतीय पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान की यह कूटनीति भारत की सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों की रणनीति की नकल है, जो 33 देशों में भारत का आतंकवाद-विरोधी रुख प्रस्तुत कर रहे हैं। भारतीय सांसद सुप्रिया सुले ने इसे “कॉपीकैट” कदम करार दिया, यह दावा करते हुए कि पाकिस्तान का यह प्रयास भारत की सफल कूटनीति का जवाब है। कुछ भारतीय स्रोतों का यह भी कहना है कि पाकिस्तान का यह मिशन केवल अपनी आतंकवाद से जुड़ी छवि को सुधारने की कोशिश है, जबकि वह आतंकी समूहों को समर्थन देना जारी रखता है।
हालांकि, पाकिस्तान के दृष्टिकोण से, यह मिशन भारत के कथित “प्रोपेगैंडा” का जवाब देने और क्षेत्रीय शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का प्रयास है। बिलावल और फातमी जैसे नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ चुका है और भारत द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करता है।
आपके “चुगली मिशन” वाले कथन को देखें, तो यह साफ है कि दोनों देश अपनी-अपनी कहानी को वैश्विक मंच पर ले जा रहे हैं। भारत जहां आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त नीति को उजागर कर रहा है, वहीं पाकिस्तान इसे भारत की आक्रामकता के रूप में चित्रित कर रहा है। यह कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का हिस्सा है। क्या आप इस मुद्दे पर किसी खास पहलू, जैसे बिलावल के बयानों या किसी विशेष देश में उनके मिशन के प्रभाव, पर और विस्तार चाहेंगे?

