जोसलीन नंदिता चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया, कांग्रेस की छात्र इकाई) की अध्यक्ष पद प्रत्याशी थीं। वे दूसरे स्थान पर रहीं, जहां ABVP के आर्यन मान ने 28,841 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि नंदिता को 12,645 वोट मिले (16,196 वोटों के अंतर से हार)। NSUI ने उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसला के साथ एकमात्र सीट जीती।
पृष्ठभूमि और शिक्षा
उम्र और मूल: 23 वर्षीय नंदिता राजस्थान के जोधपुर जिले के एक किसान परिवार से हैं। वे 2019 से दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा रही हैं। वर्तमान में वे बौद्ध अध्ययन (Buddhist Studies) में स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) कर रही हैं।
शैक्षणिक यात्रा: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई की है। NSUI ने उन्हें पहली महिला प्रत्याशी के रूप में चुना, जो 17 वर्षों (2008 के बाद) में पार्टी से अध्यक्ष पद पर लड़ने वाली पहली महिला हैं।
राजनीतिक यात्रा और NSUI से जुड़ाव
नंदिता NSUI की सक्रिय सदस्य हैं और छात्र राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर जोर देती हैं। वे DU कैंपस में छात्र मुद्दों जैसे हॉस्टल सुविधाओं, सामाजिक न्याय और समावेशी नीतियों पर काम करती रही हैं।
NSUI ने उन्हें अध्यक्ष पद का टिकट देकर “हम बदलेंगे DU” अभियान चलाया, जिसमें पैनल नंबर 5225 था। हालांकि, कुछ आंतरिक विवादों (जैसे टिकट वितरण पर असहमति) और सोशल मीडिया फोकस की वजह से उनकी उम्मीदवारी विवादास्पद रही। NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने उन्हें समर्थन दिया, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ नेताओं (जैसे कन्हैया कुमार पांडेय पर आरोप) ने कथित तौर पर हार में भूमिका निभाई।
चुनाव अभियान और मुख्य मुद्दे
अभियान फोकस: नंदिता ने महिलाओं की सुरक्षा, जेंडर सेंसिटाइजेशन कमिटी (GSCASH) को मजबूत करना, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, माहवारी अवकाश (menstrual leave) और छात्र कल्याण पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं पूरी तरह आशावादी हूं कि अच्छे नतीजे आएंगे।” उनका सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम पर 2 लाख+ फॉलोअर्स) अभियान मजबूत था, लेकिन ग्राउंड-लेवल एक्टिविटी कम बताई गई।
विवाद: नाम पर विवाद रहा—कुछ रिपोर्ट्स में उनका पुराना नाम “जीतू चौधरी” बताया गया, जिसे उन्होंने “जोसलीन नंदिता” कर लिया। इससे धर्मांतरण और पहचान पर सवाल उठे, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। ABVP ने इसे प्रचारित किया, जबकि NSUI ने इसे खारिज किया। इसके अलावा, चुनाव में धांधली के आरोप (जैसे EVM पर स्याही चिह्न) लगे, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया।
चुनाव परिणाम का संदर्भ
कुल मतदान: 39.45% (1.55 लाख+ वोटरों में से 60,272 वोट)।
NSUI की हार के बाद वरुण चौधरी ने कहा, “हमने अच्छी लड़ाई लड़ी, लेकिन DU प्रशासन, दिल्ली सरकार और RSS-BJP के संयुक्त प्रयासों के खिलाफ लड़े।” नंदिता की हार को NSUI के लिए झटका माना गया, लेकिन उन्होंने छात्रों के समर्थन की सराहना की।
नंदिता की उम्मीदवारी ने महिलाओं के मुद्दों को सुर्खियों में लाया, भले ही वे दूसरे नंबर पर रहीं। यह DU की छात्र राजनीति में लिंग समानता पर बहस को ताजा करता है।
यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों (जैसे NDTV, Hindustan Times, Indian Express) और X पोस्ट्स से संकलित है, जहां उनकी हार को ABVP की मजबूत संगठन क्षमता और NSUI के आंतरिक मुद्दों से जोड़ा गया।
शैक्षणिक यात्रा: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई की है। NSUI ने उन्हें पहली महिला प्रत्याशी के रूप में चुना, जो 17 वर्षों (2008 के बाद) में पार्टी से अध्यक्ष पद पर लड़ने वाली पहली महिला हैं।
राजनीतिक यात्रा और NSUI से जुड़ाव
नंदिता NSUI की सक्रिय सदस्य हैं और छात्र राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर जोर देती हैं। वे DU कैंपस में छात्र मुद्दों जैसे हॉस्टल सुविधाओं, सामाजिक न्याय और समावेशी नीतियों पर काम करती रही हैं।
NSUI ने उन्हें अध्यक्ष पद का टिकट देकर “हम बदलेंगे DU” अभियान चलाया, जिसमें पैनल नंबर 5225 था। हालांकि, कुछ आंतरिक विवादों (जैसे टिकट वितरण पर असहमति) और सोशल मीडिया फोकस की वजह से उनकी उम्मीदवारी विवादास्पद रही। NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने उन्हें समर्थन दिया, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ नेताओं (जैसे कन्हैया कुमार पांडेय पर आरोप) ने कथित तौर पर हार में भूमिका निभाई।
चुनाव अभियान और मुख्य मुद्दे
अभियान फोकस: नंदिता ने महिलाओं की सुरक्षा, जेंडर सेंसिटाइजेशन कमिटी (GSCASH) को मजबूत करना, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, माहवारी अवकाश (menstrual leave) और छात्र कल्याण पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं पूरी तरह आशावादी हूं कि अच्छे नतीजे आएंगे।” उनका सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम पर 2 लाख+ फॉलोअर्स) अभियान मजबूत था, लेकिन ग्राउंड-लेवल एक्टिविटी कम बताई गई।
विवाद: नाम पर विवाद रहा—कुछ रिपोर्ट्स में उनका पुराना नाम “जीतू चौधरी” बताया गया, जिसे उन्होंने “जोसलीन नंदिता” कर लिया। इससे धर्मांतरण और पहचान पर सवाल उठे, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। ABVP ने इसे प्रचारित किया, जबकि NSUI ने इसे खारिज किया। इसके अलावा, चुनाव में धांधली के आरोप (जैसे EVM पर स्याही चिह्न) लगे, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया।
चुनाव परिणाम का संदर्भ
कुल मतदान: 39.45% (1.55 लाख+ वोटरों में से 60,272 वोट)।
NSUI की हार के बाद वरुण चौधरी ने कहा, “हमने अच्छी लड़ाई लड़ी, लेकिन DU प्रशासन, दिल्ली सरकार और RSS-BJP के संयुक्त प्रयासों के खिलाफ लड़े।” नंदिता की हार को NSUI के लिए झटका माना गया, लेकिन उन्होंने छात्रों के समर्थन की सराहना की।
नंदिता की उम्मीदवारी ने महिलाओं के मुद्दों को सुर्खियों में लाया, भले ही वे दूसरे नंबर पर रहीं। यह DU की छात्र राजनीति में लिंग समानता पर बहस को ताजा करता है।
यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों (जैसे NDTV, Hindustan Times, Indian Express) और X पोस्ट्स से संकलित है, जहां उनकी हार को ABVP की मजबूत संगठन क्षमता और NSUI के आंतरिक मुद्दों से जोड़ा गया।

