Site icon Thenews15.in

जिंदगी से ज्यादा जॉब की टेंशन! ईरान जंग के साये में मजबूर भारतीयों का दर्द

जिंदगी से ज्यादा जॉब की टेंशन! ईरान जंग (असल में US-Israel vs Iran conflict) के साये में मजबूर भारतीयों का दर्द वाकई दिल दहला देने वाला है। मार्च 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष ने गल्फ देशों और ईरान में रहने वाले लाखों भारतीयों की जिंदगी और रोजी-रोटी दोनों पर गहरा असर डाला है।
कौन-कौन फंस गए हैं?

ईरान में: करीब 3,000 भारतीय छात्र (जिनमें से लगभग 2,000 जम्मू-कश्मीर के) फंसे हुए हैं। कई जगहों पर एयर स्ट्राइक्स, इंटरनेट बंद, यूनिवर्सिटी बंद होने की खबरें हैं। छात्रों ने सरकार से तुरंत evacuation की अपील की है – “हम safe नहीं हैं, बचा लो” जैसी पुकारें आई हैं।
गल्फ देशों (UAE, Saudi, Qatar, Kuwait, Bahrain आदि) में: कुल 9-10 मिलियन (90 लाख से ज्यादा) भारतीय काम कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर blue-collar वर्कर्स – कंस्ट्रक्शन, ड्राइवर, टेक्नीशियन, ऑयल-गैस सेक्टर के मजदूर। UAE में ही 35 लाख+, Saudi में 25 लाख के करीब।
समुद्री क्षेत्र: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई भारतीय जहाज (क्रूड ऑयल, LPG वाले) फंसे हुए। कुछ भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत भी हो चुकी है। भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ शुरू किया है।

 

मजबूरी क्या है?

 

ये लोग जॉब छोड़कर आसानी से नहीं लौट सकते। कई परिवारों का गुजारा इन्हीं रेमिटेंस (हर साल ~$50 बिलियन) पर टिका है। जंग बढ़ने से:

फ्लाइट्स रद्द, एयरस्पेस बंद → सैकड़ों-हजारों लोग एयरपोर्ट पर फंसे (दुबई, अबू धाबी आदि)।
कंपनियां ऑपरेशन बंद कर रही हैं → जॉब छिनने का डर।
ऑयल-गैस, कंस्ट्रक्शन सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित।
घर में LPG, कुकिंग गैस की कमी और महंगाई का असर भारत में भी दिख रहा है।

एक वर्कर ने कहा- “जिंदगी तो चल जाएगी, लेकिन जॉब चली गई तो परिवार क्या खाएगा?” यही टेंशन है – मौत का खतरा तो है, लेकिन घर लौटने पर बेरोजगारी का डर ज्यादा सता रहा है। कई लोग “stay put” कर रहे हैं क्योंकि गल्फ की अर्थव्यवस्था इन्हीं पर चलती है।
भारत सरकार क्या कर रही है?

MEA ने 24×7 कंट्रोल रूम बनाया, एडवाइजरी जारी की, भारतीय मिशनों को संपर्क में रखा।
स्पेशल फ्लाइट्स से कुछ लोगों को निकाला गया।
कुछ भारतीयों की मौत/घायल होने की खबरें भी आईं (जैसे कुवैत में एक वर्कर, अबू धाबी में कुछ घायल)।
सरकार ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा “टॉप प्रायोरिटी” है।

 

बड़ा असर भारत पर

 

रेमिटेंस का खतरा (9 मिलियन वर्कर्स का योगदान)।
तेल आयात (Strait of Hormuz से आता है) महंगा → महंगाई।
शिपिंग और एविएशन पर असर।
UP, केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के परिवारों में चिंता।

ये स्थिति याद दिलाती है कि विदेश में मेहनत करने वाले हमारे भाई-बहन सिर्फ “नंबर” नहीं, बल्कि असली इंसान हैं जिनकी जिंदगी जॉब, परिवार और सुरक्षा के बीच झूल रही है। जंग में कोई जीतने वाला नहीं होता – सिर्फ आम लोग (विशेषकर मजदूर) सबसे ज्यादा कष्ट झेलते हैं।

Exit mobile version