पीएम मोदी के संबोधन से:
युद्ध तीन सप्ताह से ज्यादा समय से चल रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और जनजीवन पर गंभीर असर पड़ा है। भारत पर चुनौतियां आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय तीनों स्तर पर हैं (खाड़ी देशों में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीय काम करते हैं, तेल-गैस आयात पर निर्भरता)।
होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है; भारत संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है।
कोविड काल की तरह पूरे देश को एकजुटता, धैर्य और संयम से इस संकट का सामना करना होगा।
राज्य सरकारों को दिए दो मुख्य टास्क:
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त नजर रखें — संकट के समय ऐसे तत्व सक्रिय हो जाते हैं। शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करें और कड़ी सजा दें। फेक न्यूज और अफवाहों पर नकेल कसें — हालात का फायदा उठाकर झूठ फैलाने वालों से सतर्क रहें। कानून-व्यवस्था एजेंसियां (साइबर, कोस्टल, बॉर्डर सिक्योरिटी सहित) पहले से अलर्ट पर हैं।
पीएम ने कहा कि सरकार शॉर्ट-टर्म, मीडियम-टर्म और लॉन्ग-टर्म रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत के पास स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व मजबूत है (53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा), रिफाइनरी क्षमता बढ़ी है और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के प्रयास जारी हैं।

