जानकारी मिल रही है कि आरएस दुबे को सहारा इंडिया समूह का प्रमुख बना दिया गया है।एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद पर काम कर रहे आर.एस. दुबे को कंपनी का डिप्टी मैनेजिंग वर्कर बनाया गया है। इस तरह की भी जानकारी मिल रही है कि दुबे को हर तरह के अधिकार दे दिए गए हैं। एक तरह से सहारा ग्रुप को चलाने की जिम्मेदारी दुबे को दे दी गई है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि सहारा में जो एक से बढ़कर अय्यार बैठे हुए हैं वे दुबे को काम करने देंगे।
जानकारी मिल रही है कि बैठक में शामिल आर.एस. दुबे ने प्रमुख का पद स्वीकार करने के पहले एक शर्त रखी थी। इस शर्त में उन्होंने कहा कि हमें बाहर कोर्ट में और कंपनी के अंदर अपने कर्मचारियों से भी लड़ना पड़ा रहा है। ऐसे में ग्रुप के सभी कर्मचारियों व रिटायर कर्मचारियों का बकाया वेतन और अन्य सभी देयकों का भुगतान किसी तरह से कर दिया जाये। भले ही कंपनी की कोई संपत्ति बेचनी पड़े। इससे हमें केवल बाहर कोर्ट में लीगल लड़ाई लड़नी पड़ेगी, जो कंपनी के लिए ठीक रहेगा। बैठक में शामिल कंपनी के मालिकानों व सभी सदस्यों ने इस सहमति जतायी है।
उधर जानकारी यह भी मिल रही है कि सहारा मुखिया सुब्रत राय के पीए रहा विजय डोगरा और रोमी दत्ता इसे फेंक न्यूज बता रहे हैं। इस खबर में सच्चाई इसलिए हो सकती है क्योंकि सीमांतो राय, सुशांतो राय और स्वप्ना राय पर ईडी का शिकंजा कसा जा रहा है। ओपी श्रीवास्तव और जेबी राय जेल जाने के डर से अपने को सहारा समूह से अलग रखकर चल रहे हैं। ऐसे में किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तो यह जिम्मेदारी दी जानी थी। मैंने आंदोलनकारियों को संस्था सौंपने की बात कही थी। चलो कर्मचारियों के भुगतान की बात उठी।
जानकारी तो ऐसी मिल रही है जैसे किसी को कोई जानकारी न दी गई हो। सहारा ग्रुप की तरफ से एक शपथ पत्र भी पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में जमा करने की बात भी सामने आ रही है।
भड़ास फॉर मीडिया में छपी खबर के अनुसार श्री दुबे को कंपनी का हेड बनाये जाने का निर्णय नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक पांच सितारा होटल में करीब 15 दिन पहले मालिकानों एवं कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की एक गोपनीय बैठक में हुआ है।
भड़ास फॉर मीडिया में छपी खबर के अनुसार श्री दुबे को कंपनी का हेड बनाये जाने का निर्णय नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक पांच सितारा होटल में करीब 15 दिन पहले मालिकानों एवं कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की एक गोपनीय बैठक में हुआ है।
देखने की बात यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर सुब्रत राय सहारा समेत चार लोगों को तिहाड़ भेजा गया था, उसमें सुब्रत राय के अलावा उनके बहनोई अशोक राय चौधरी, वंदना भार्गव और आर.एस. दुबे भी शामिल थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने महिला होने के नाते वंदना भार्गव को जेल नहीं भेजा, लेकिन तीन लोग करीब 2 साल जेल में बंद रहे।
ऐसे में यदि यह खबर सही निकलती है और दुबे ने कर्मचारियों के भुगतान की कोई शर्त रखी है तो सहारा कर्मचारियों का कुछ भला हो जाएगा। मैंने खुद लिखा था कि यदि सहारा कर्मचारियों का भुगतान संस्था कर दे तो कर्मचारी आज भी संस्था को आगे बढ़ाने में अपनी जान लगा देंगे। यदि दुबे संस्था को संवारने का प्रयास करें तो सहारा संस्था पटरी पर लौट सकती है। अब देखना यह होगा कि इस खबर में कितना दम है और यदि खबर सही है तो दुबे क्या गुल खिलाते हैं और उन्हें कितना काम करने दिया जाता है।

